इन मैलिसियस एप्स के फोन में इंस्टॉल होने से हैकर्स आपकी बैकिंग डिटेल की चोरी कर सकते हैं। ऐसे में अगर आपके मोबाइल फोन में ये 10 खतरनाक एप्स इंस्टॉल हैं तो तुरंत इन्हें अनइंस्टॉल कर दें। वरना आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है। Telegram group :http://@Technicalmechzone
नई दिल्ली, टेक डेस्क। अगर आप मोबाइल फोन से डिजिटल लेनदेन यानि पैसों का ऑनलाइन ट्रांजैक्शन करते हैं, तो आपको कुछ बातों को लेकर सावधानी बरतनी चाहिए। दरअसल चेक प्वाइंट रिसर्च में एक नये खतरनाक मैलिसियस एप्स के सेट की पहचान हुई है, जो आपके वित्तीय लेनदेन को नुकसान पहुंचा सकते हैं। मतलब इन मैलिसियस एप्स के फोन में इंस्टॉल होने से हैकर्स आपकी बैकिंग डिटेल की चोरी कर सकते हैं। ऐसे में अगर आपके मोबाइल फोन में ये 10 खतरनाक एप्स इंस्टॉल हैं, तो तुरंत इन्हें अनइंस्टॉल कर दें। वरना आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है।
Google को चकमा देने में सक्षम हैं ये मोबाइल एप्स
चेक प्वाइंट रिसर्च के ब्लॉग पोस्ट के मुताबिक, जिन 10 एंड्राइड एप्स की पहचान हुई है,जो Clast82 नामक ड्रॉपर से संक्रमित हुए हैं, जो किसी व्यक्ति के स्मार्टफोन में AlienBot Banker और MRAT इंस्टॉल करता है। एलियनबोट एक प्रकार का मैलवेयर है, जो फाइनेंशियल एप्स को प्रभावित कर सकता है और बैकिंग डिटेल को चोरी करने का काम करता है। यह ड्रापर इतने शक्तिशाली हैं, जो आसानी Google को धोखा देकर बच निकलने में सक्षम है। साथ ही टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन कोड को भी चकमा दे सकते हैं। इससे वित्तीय लेनदेन में नुकसान उठाना पड़ सकता है।
चेन प्वाइंट रिसर्च ने इस बाबत Google से बातचीत करके Google Play Store से इन दस खतरनाम एप्स को हटाने की मांग की है। Google ने साफ किया है कि कंपनी इन सभी एप्स को हटा दिया गया है, लेकिन अगर इसके बावजूद आपके फोन में ये खतरनाक एप्स मौजूद हैं, तो तुरंत हटा दें। बता दें Google की तरफ से भी समय-समय पर Google Play Store से खतरनाक एप्स को हटाया जाता है।
पिछले कुछ दिनों से दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी बिटक्वाइन में बड़ी उछाल देखी जा रही है। अपने सभी रिकाॅर्ड को तोड़ते हुए एक बिटक्वाइन की ताजा कीमतें 60,000 डाॅलर के पार पहुंच गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के पिछले दिनों 1.9 ट्रिलियन डॉलर की मदद के आदेश के बाद से ही बाजार में तेजी देखी जा रही है। और इसका असर बिटक्वाइन पर भी दिख रहा है। हालांकि कई एक्सपर्ट का मानना है कि यह तेजी सिर्फ कुछ ही समय के लिए है। बीच में एक ऐसा समय आया था जब क्रिप्टोकरेंसी की कीमतों में अचानक गिरावट आने लगी थी।
पिछले एक साल के दौरान बिटक्वाइन की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है। जहां एक साल पहले एक बिटक्वाइन की कीमत महज 5000 डाॅलर थी तो वहीं अब यह बढ़कर 60,000 डाॅलर के पार पहुंच गई है। भारतीय रुपये में अगर एक बिटक्वाइन की कीमत आंके तो यह करीब 43.85 लाख रुपया होगा।
इतनी तेजी के पीछे का कारण क्या है
बिटक्वाइन में दुनिया के कई बड़े इन्वेस्टर इंवेस्ट किए हुए हैं। इलेक्ट्रिक कार बनाने वाली कंपनी टेस्ला के मालिक एलन मस्क पिछले ने भी इसमें पैसा लगाया है। उन्होंने करीब 1.5 बिलियन डॉलर का इंवेस्टमेंट इसमें किया है। एलन मस्क समय-समय पर इसमें इंवेस्ट करने की सलाह भी देते रहते हैं। मार्केट एक्सपर्ट ईड मोया के अनुसार, ‘बिटक्वाइन की कीमतें एक बार फिर बहुत तेजी से बढ़ेगी। और इसे रोकना किसी के लिए भी संभव नहीं होगा।’
करीब 350 अरब डॉलर के बाजार पूंजीकरण के साथ बिटक्वाइन दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी बन चुकी है। इसे 2009 में उस समय लांच किया गया था जब दुनिया में आर्थिक संकट आ चुका था। गणितीय गणनाओं के हल के आधार पर कंप्यूटरों ने बिटक्वाइन के अतिरिक्त यूनिट्स को तैयार किया। यह गणना हर बार यूनिट के जोड़े जाने के बाद और भी जटिल होती जाती है। इस आभासी मुद्रा की सबसे रोचक बात यह है कि इसका हिसाब-किताब हजारों कंप्यूटरों में एक साथ सार्वजनिक लेजर में रखा जाता है। यह ठीक उस प्रक्रिया के उलट है, जिसमें पारम्परिक मुद्राओं का हिसाब बैंकों के सर्वर में रखा जाता है।
अफ्रीका (Afrcia) के सहारा रेगिस्तान (Sahara Desert) में एक उल्कापिंड (Meteroite) मिला है जो पृथ्वी (Earth) के बनने से पहले बना था. इससे सौरमंडल में ग्रह निर्माण की प्रक्रिया के बारे में पता चल सकता है.उल्कापिंड (Meteorite) के बारे में कहा जाता है कि वह उस समय के होते हैं जब हमारे सौरमंडल (Solar System) में पृथ्वी (Earth) जैसे ग्रहों का निर्माण हो रहा था. लेकिन शोधकर्ताओं ने अफ्रीका के सहारा रेगिस्तान (Sahara Desert) में एक उल्कापिंड की चट्टान का टुकड़ा खोजा है जो पृथ्वी से भी पुराना बताया जा रहा है. यह पत्थर एक ऐसे ग्रह का माना जा रहा जिसका निर्माण शुरू ही हुआ था और तक तक पृथ्वी अपने अस्तित्व में भी नहीं आई थी
क्या खास है इस उल्कापिंड में :इस उल्कापिंड को Erg Chech 002 या EC 002 नाम दिया गया है. शोधकर्ताओं के अनुसार यह एक पुरातन प्रोटोप्लैनेट की पर्पटी के अंदर बना था. प्रोटोप्लैनेट ग्रहों के मूल रचना खंड होते हैं. शोधकर्ताओं का कहना है कि यह अब तक का सबसे पुराना ज्ञात लावा है जो पृथ्वी पर गिरा है. इसका अध्ययन करने से हमारे सौरमंडल के शुरुआती समय में ग्रहों की निर्माण के बारे में जानकारी मिल सकती है.
कहां मिला है यह उल्कापिंड यह पत्थर अफ्रीका के अलजीरिया के अर्ग चेच ड्यून सागर में मिला था और उसकी आधार पर उसे नाम दिया गया है. वास्तव में यह बहुत सारे उल्कापिंडों से बना है और उसका वजन 70 पाउंड यानि करीब 32 किलो का है. शोधकर्ताओं ने इसका विश्लेषण कर पाया है कि पर्पटी का यह टुकड़ा लावा की तरह पिघला हुआ था और उसके बाद क्रिस्टलीकरण होकर वह ठोस बन गया.
कितना पुराना इस पत्थर के मैग्नीशियम और एल्यूमीनियम आइसोटोप्स के अध्ययन से पता चला है कि यह 4.566 अरब साल पुराना है जो अभी तक पाया गया सबसे पुराना आग्नेय शैल है. इससे पहले आग्नेय शैल वाला उल्कापिंड NWA11119 था जो EC002से 12.4 लाख साल छोटा है. पृथ्वी ईन पत्थरों से कई लाख सालों के बाद अस्तित्व में आई थी.
किससे बना है यह उल्कापिंड यह उल्कापिंड में 58 प्रतिशत सिलिकॉन डाइऑक्साइड है जिससे पता चलता है कि पुराने पिंड के एंडेसाइट चट्टान की पर्पटी से बनी है. यह पृथ्वी के ज्वालामुखी इलाकों में पाई जाने वाली बेसाल्ट चट्टान से काफी अलग है. यह पभी पता चला है कि ऐसी पर्पटी हमारे सौरमंडल के शुरुआती समय में क्षुद्रग्रह और प्रोटोप्लैनेट में पाई जाती थी और आज यह बहुत ही कम पाई जाती है.
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बहुत ही ज्यादा अलग
प्रोसिडिसिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेस में प्रकाशित इस अध्ययन की प्रमुख लेखिका और फ्रांस की वेस्टर्न ब्रिटैनी यूनिवर्सिटी में जियोकैमिस्ट्री की प्रोफेसरजीन एलिक्स बैरेट कहती हैं कि EC 002 दूसरे क्षुद्रग्रह समूहों से स्पष्ट तौर पर अलग है. किसी भी पिंड की स्पैक्ट्रल विशेषताएं इससे अभी तक कहीं भी मेल नहीं खाती नहीं दिखी हैं.
कम क्यों दिखते हैं ऐसे पिंड बैरेट का दावा है कि पुरातन पर्पटी के अवशेष उल्कापिंड केरिकॉर्ड में न केवल बहुत ही कम पाए गए हैं, बल्कि ये आज के क्षुद्रग्रह की पट्टी में भी बहुत ही कम हैं. इससे यह संकेत मिलता है कि सौरमंडल के शुरुआती प्रोटोप्लैनेट और उनकी ज्यादातर टुकड़े या तो निश्चित तौर पर खत्म हो गए था. या फिर बढ़ते पथरीले ग्रहों से जुड़ते गए थे. यही वजह रही होगी पुरातन पर्पटी से निकलने वाले इस तरह के उल्कापिंड अपवाद की तरह दिख रहे हैं.माना जा रहा है कि EC 002 अपने मूल प्रोटोप्लैनेट की पर्पटी के ठंडे होने और क्रिटलीकरण होने के दशकों बाद निकला होगा जिससे वह उस समय के ग्रहों के क्रोड़ के विकास की जानकारी दे रहा है जब हमारी पृथ्वी अस्तित्व में ही नहीं थी.
Royal Enfield के शौकीनों के लिए खुशखबरी है, देश की प्रमुख परफॉर्मेंस बाइक निर्माता कंपनी जल्द ही बाजार में अपनी कुछ नई बाइक्स को लेकर आने वाली है। आने वाली इन बाइक्स की लिस्ट में पुराने मॉडल्स के नए फेसलिफ्ट वर्जन के साथ ही नई बाइक्स भी शामिल हैं। इन बाइक्स को कई मौकों पर टेस्टिंग के दौरान स्पॉट किया गया है, जिसके बाद इनसे जुड़ी कुछ खास बातें भी सामने आई हैं। तो आइये जानते हैं इन आने वाली बाइक्स के बारे में –
नई Royal Enfield Classic 350: कंपनी की बेस्ट सेलिंग मॉडल क्लॉसिक के नए मॉडल को कंपनी अगले साल बाजार में पेश कर सकती है। हाल ही में इस बाइक को टेस्टिंग के दौरान स्पॉट किया गया है। जानकारी के अनुसार कंपनी की यह नई बाइक J1-349 मोटर प्लेटफॉर्म पर तैयार की गई है। इस बाइक में कंपनी नेविगेटर फीचर को भी शामिल करेगी, जो कि बाइक को मौजूदा मॉडल से बेहतर बनाएगा।
Royal Enfield Hunter: रॉयल एनफील्ड बाजार में अपनी नई बाइक हंटर को अगले साल तक पेश कर सकती है। हालांकि अभी इस बाइक के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी है। जानकारी के अनुसार यह बाइक रेट्रो क्लॉसिक स्टाइल पर बेस्ड होगी। कंपनी इस बाइक में 350 की क्षमता का इंजन प्रयोग करेगी। यह मौजूदा क्लॉसिक 350 मॉडल के मुकाबले और भी कॉम्पैक्ट होगी।
Royal Enfield Cruiser 650: कंपनी जल्द ही बाजार में अपनी नई हैवी क्रूजर बाइक को भी लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। हालांकि अभी इस बाइक के नाम से पर्दा नहीं उठा है, लेकिन इसे कई मौकों पर टेस्टिंग के दौरान स्पॉट किया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कंपनी इस बाइक में 648cc की क्षमता का इंजन प्रयोग कर रही है, जो कि 47bhp की पावर और 52Nm का टॉर्क जेनरेट करता है। ऐसा माना जा रहा है कि इसकी कीमत तकरीबन 3.50 लाख रुपये के आस पास होगी।
Royal Enfield Roadster: कंपनी अगले साल बाजार में नई ट्वीप सिलिंडर क्रूजर मोटरसाइकिल को पेश कर सकती है। हाल ही में इस बाइक को टेस्टिंग के दौरान स्पॉट भी किया गया है। इसमें कुछ नए फीचर्स को भी शामिल किया जाएगा, जैसे कि पुल बैक स्टाइल हैंडलबार, टियरड्रॉप फ्यूल टैंक, स्पलिट सीट्स और एलॉय व्हील दिए जाएंगे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कंपनी इस बाइक को ‘Roadster’ नाम दे सकती है।
Redmi Note 9 Pro Max को 6GB RAM + 64GB स्टोरेज ऑप्शन में आता है। इसकी कीमत 14,999 रुपये है। इस फोन की कीमत को पिछले दिनों ही कम किया गया है। य़ह फोन 16,999 रुपये की कीमत में लॉन्च हुआ था।
इस तरह उठाएं ऑफर का लाभ Flipkart पर इस स्मार्टफोन की लिस्टिंग प्राइस 18,999 रुपये है, जिस पर 4000 रुपये का फ्लैट डिस्काउंट मिलता है। इस स्मार्टफोन को Axis बैक के क्रेडिट या डेबिट कार्ड से खरीदने पर 10 प्रतिशत तक का अतिरिक्त डिस्काउंट भी मिलता है। इस फोन को आप 14,999 रुपये की जगह 549 रुपये में घर ले जा सकते हैं, क्योंकि इसकी खरीद पर 14,450 रुपये तक का एक्सचेंज ऑफर दिया जाता है। अगर आप अपने किसी पुराने फोन को एक्सचेंज कराते हैं और उसपर पूरा वैल्यू मिलता है तो इसकी कीमत 549 रुपये रह जाती है।
Redmi Note 9 Pro Max के फीचर्स Redmi Note 9 Pro Max में 6.67 इंच का फुल एचडी प्लस डिस्प्ले मिलता है। फोन में सेंट्रली अलाइंड पंच-होल डिस्प्ले मिलता है। फोन Android 10 पर आधारित MIUI 12 पर काम करता है।
Redmi Note 9 Pro Max की परफॉर्मेंस यह स्मार्टफोन Qualcomm Snapdragon 720G प्रोसेसर के साथ आता है। इसमें 6GB RAM + 64GB स्टोरेज मिलती है। इसकी इंटरनल मेमोरी को माइक्रोएसडी कार्ड के जरिए 512GB तक बढ़ाई जा सकता है। इसमें 5020mAh की बैटरी मिलती है।
Redmi Note 9 Pro Max का कैमरा Redmi Note 9 Pro Max के कैमरे की बात करें तो इसके बैक में क्वाड रियर कैमरा सेटअप मिलता है। फोन का प्राइमरी सेंसर 64MP का दिया गया है। 8MP का वाइड एंगल कैमरा सेट अप दिया गया है। फोन में 5MP का डेप्थ सेंसर दिया गया है और 2MP का मैक्रो कैमरा दिया गया है। फोन में सेल्फी के लिए 32MP का कैमरा मिलता है।
निम्नलिखित सामान्य ज्ञान पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दें और प्रत्येक प्रश्न के उत्तर की व्याख्या को भी अध्ययन करें. UPSC, SSC, और राज्य PSCs जैसी सरकारी नौकरी परीक्षाओं की अच्छी तैयारी के लिए इन प्रश्नों को हल करें.
1. भारत का पहला एलिवेटेड अर्बन एक्सप्रेसवे (India’s first elevated Urban Expressway) कहां है?
A. दिल्ली से गुरुग्राम (Delhi to Gurugram) B. लखनऊ से इलाहाबाद (Lucknow to Allahabad) C. मुंबई से पुणे (Mumbai to Pune) D. चेन्नई से बेंगलुरु (Chennai to Bengaluru) Ans. A व्याख्या: एलिवेटेड अर्बन एक्सप्रेसवे (Elevated Urban Expressway) द्वारका, दिल्ली को गुरुग्राम से जोड़ता है. इसका निर्माण भारतमाला परियोजना के तहत किया जा रहा है.
2. निम्नलिखित में से कौन सा कथन एलिवेटेड अर्बन एक्सप्रेसवे (Elevated Urban Expressway) के बारे में सही है.
1. एक्सप्रेसवे चार पैकेजों (Four packages) में बनाया जा रहा है. 2. इसकी लगभग 18.9 किलोमीटर की लंबाई हरियाणा में और लगभग 10.1 किलोमीटर की लंबाई दिल्ली में होगी. A. केवल 1 B. केवल 2 C. 1 और 2 दोनों D इनमे से कोई भी नहीं Ans. C व्याख्या: लगभग 29 किलोमीटर का एक्सप्रेसवे, जो द्वारका, दिल्ली को गुरुग्राम से जोड़ता है, का निर्माण भारतमाला परियोजना के तहत किया जा रहा है. एक्सप्रेसवे चार पैकेजों में बनाया जा रहा है. इसकी लगभग 18.9 किलोमीटर की लंबाई हरियाणा में और लगभग 10.1 किलोमीटर की लंबाई दिल्ली में होगी.
3. भारत में राजमार्ग क्षेत्र के लिए अम्ब्रेला परियोजना (Umbrella project) कौन सी है?
A. सागरमाला परियोजना (Sagarmala Project) B. स्वर्णिम चतुर्भुज (Golden Quadrilateral) C. भारतमाला परियोजना (Bharatmala Project) D. राष्ट्रीय कॉरिडोर परियोजना (National Corridor Project) Ans. C व्याख्या: भारतमाला को भारत के राजमार्ग क्षेत्र के लिए एक नया अम्ब्रेला परियोजना (Umbrella project) कहा जा सकता है, जो पूरे देश में माल ढुलाई और यात्री आवाजाही की दक्षता के अनुकूलन पर केंद्रित है.
4. GISAT-1 क्या है?
A. Geo Imaging Satellite B. Geo Stationary Satellite C. Geosynchronous Satellite D. इनमें से कोई भी नहीं Ans. A व्याख्या: GISAT-1 एक Geo Imaging Satellite है जिसे आंध्रप्रदेश के नेल्लोर जिले में स्थित श्रीहरिकोटा अंतरिक्षयान से GSLV-F10 रॉकेट द्वारा अंतरिक्ष में भेजने की योजना है.
5. GISAT-1 का उद्देश्य क्या है?
1. यह लगातार अंतराल पर भारतीय उपमहाद्वीप के बड़े क्षेत्र की वास्तविक समय की इमेजिंग प्रदान करेगा. 2. यह उपग्रह प्राकृतिक आपदाओं या किसी अल्पकालिक घटनाओं / प्रकरणों की त्वरित निगरानी के लिए सहायक होगा. A. केवल 1 B. केवल 2 C. 1 और 2 दोनों D इनमे से कोई भी नहीं Ans. C व्याख्या: यह लगातार अंतराल पर भारतीय उपमहाद्वीप के बड़े क्षेत्र की वास्तविक समय की इमेजिंग प्रदान करेगा. यह उपग्रह प्राकृतिक आपदाओं या किसी अल्पकालिक घटनाओं / प्रकरणों की त्वरित निगरानी के लिए सहायक होगा. यह कृषि, वानिकी, खनिज विज्ञान इत्यादि के वर्णक्रमीय हस्ताक्षर (Spectral signatures)प्राप्त करने में मदद करेगा.
6. निम्नलिखित में से किसके द्वारा NETRA प्रोजेक्ट की शुरुआत की गई?
A. ISRO B. DRDO C. Indian Army D. NASA Ans. A व्याख्या: ISRO द्वारा NETRA प्रोजेक्ट की शुरुआत की गई थी, जो अंतरिक्ष मलबे और अंतरिक्ष के अन्य खतरों से उपग्रहों को बचाने के लिए एक प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली है.
7. टाइम मैगज़ीन द्वारा किसे ‘फर्स्ट एवर किड ऑफ द ईयर’ (‘First ever Kid of the Year’) से सम्मानित किया गया है?
A. Gitanjali Rao B. Emmanuelle Charpentier C. Jennifer A Doudna D. Kalli Purie Ans. A व्याख्या: पंद्रह वर्षीय वैज्ञानिक और आविष्कारक गीतांजलि राव (Gitanjali Rao) को टाइम पत्रिका के पहले ‘किड ऑफ द ईयर’ (‘First ever Kid of the Year’) के रूप में चुना गया.
8. कैप्टन तानिया शेरगिल (Captain Tania Shergill) के बारे में सही कथन चुनें.
1. कैप्टन तान्या शेरगिल(Captain Tania Shergill) ने नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस परेड में Corps of Signals की एक सर्व-पैदल मार्च (All-men marching contingent) का नेतृत्व किया. 2. वह सेना दिवस समारोह के इतिहास में पहली महिला परेड एडजुटेंट (Adjutant) हैं. A. केवल 1 B. केवल 2 C. 1 और 2 दोनों D इनमे से कोई भी नहीं Ans. C व्याख्या: कैप्टन तान्या शेरगिल(Captain Tania Shergill) ने नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस परेड में Corps of Signals की एक सर्व-पैदल मार्च (All-men marching contingent) का नेतृत्व किया. वह सेना दिवस समारोह के इतिहास में पहली महिला परेड एडजुटेंट (Adjutant) हैं.
9. भारतीय रेलवे द्वारा घोषित नया रेलवे हेल्पलाइन नंबर (new Railway Helpline Number) क्या है?
A. 121 B. 139 C. 111 D. 911 Ans. B व्याख्या: भारतीय रेलवे ने सभी हेल्पलाइन नंबरों को मर्ज करने का फैसला किया है और सभी प्रकार के प्रश्नों और शिकायतों के लिए एक नए एकल नंबर 139 की घोषणा की है. रेलवे के अन्य सभी हेल्पलाइन नंबरों को बंद कर एक अप्रैल 2021 से 139 में विलय कर दिया जाएगा.
10. कलारीपयट्टू (Kalaripayattu) क्या है?
A. केरल की नौका दौड़ B. वह बुलफाइट जो केरल में होती है C. तमिलनाडु में आयोजित खेल D. इस खेल की शुरुआत केरल में हथियारों के इस्तेमाल से हुई थी Ans. D व्याख्या: कलारीपयट्टू (Kalaripayattu) एक खेल है जिसकी उत्पत्ति केरल में हुई थी. इसमें chattom (jumping), ottam (running) और marichil (somersault) और तलवार, खंजर, भाले, धनुष और तीर जैसे हथियार शामिल हैं.
रिटर्न के मामले में Orchid Pharma का स्टॉक न केवल बिटकॉइन बल्कि सोना और कमोडिटीज से भी आगे निकल गया है. चार महीने में Orchid Pharma के शेयर ने 6800 फीसदी से ज्यादा रिटर्न दिया है.
एक भारतीय फार्मा कंपनी के स्टॉक ने रिटर्न देने के मामले में क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन (Bitcoin) को पीछे छोड़ दिया है. इस फार्मा कंपनी ने केवल चार महीने में 6,800 फीसदी से ज्यादा का बंपर रिटर्न दिया है. रिटर्न के मामले में Orchid Pharma का स्टॉक न केवल बिटकॉइन बल्कि सोना और कमोडिटीज से भी आगे निकल गया है. चार महीने में Orchid Pharma के शेयर ने 6800 फीसदी से ज्यादा रिटर्न दिया है. जिन निवेशकों ने 4 महीने पहले इसमें 1 लाख रुपए निवेश किए होंगे, उनका निवेश अब बढ़कर 68 लाख रुपए हो गया होगा.
3 नवंबर 2020 को Orchid Pharma के शेयर का भाव 18 रुपए था, उसकी कीमत बढ़कर अब 1245.39 रुपए हो गई है. इस तरह केवल 4 महीने में स्टॉक की कीमत 6818 फीसदी बढ़ गई. इतने समय में बीएसई का बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स ने लगभग 27 फीसदी रिटर्न दिया है. वहीं, बिटकॉइन 200 फीसदी से ज्यादा बढ़ा है.
52 हफ्ते के हाई पर पहुंच स्टॉक मंगलवार को Orchid Pharma का शेयर का भाव बढ़कर 52 हफ्ते की नई ऊंचाई 1,245.30 रुपए पर पहुंच गया. आज स्टॉक में 5 फीसदी का अपर सर्किट लगा है. सोमवार को भी शेयर में 5 फीसदी का अपर सर्किट लगा था. बता दें कि 3 नवंबर को स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होने के बाद से स्टॉक में हर दिन अपर सर्किट लगा है.
धानुका लैब्स ने किया था Orchid Pharma का अधिग्रहण बता दें कि धानुका लैब्स (Dhanuka Labs) ने एनसीएलटी रेजोल्यूशन के तहत Orchid Pharma का अधिग्रहण किया था. चेन्नई स्थित दवा कंपनी का मार्केट कैप बढ़कर 5,082.87 करोड़ रुपए हो गया.
शेयरहोल्डिंग पैटर्न के मुताबिक, Orchid Pharma में धानुका लैब की हिस्सेदारी 99.96 फीसदी है और वित्तीय संस्थानों की हिस्सेदारी 0.04 फीसदी है.
कंपनी की वित्तीय स्थिति 31 दिसंबर 2020 को समाप्त तिमाही में फार्मा कंपनी को 45.33 करोड़ रुपए का घाटा हुआ था. जबकि दिसंबर 2019 में कंपनी का घाटा 34.75 करोड़ रुपए था. वहीं, दिसंबर तिमाही में कंपनी की बिक्री 20.18 फीसदी घटकर 102.63 करोड़ रुपए रही जबकि दिसंबर 2019 में बिक्री 128.58 करोड़ रुपए थी.
नई दिल्ली। क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन की कीमत 51,000 डॉलर के पार पहुंच गई है और निवेशकों को इसकी कीमत ज्यादा लगने लगी है। यही वजह है कि निवेशक ऐसी क्रिप्टोकरेंसी तलाश रहे हैं, जिन पर दांव लगाया जा सके। निवेशक उन पर दांव लगाना चाहते हैं, ताकि भाव बढऩे पर अच्छा मुनाफा कमाया जा सके। दुनिया में क्रिप्टोकरेंसी का बाजार 1.54 लाख करोड़ डॉलर के पार पहुंच गया है। भले ही इसमें बिटकॉइन का सबसे ज्यादा योगदान हो और वह सबसे लोकप्रिय क्रिप्टोकरेंसी हो, लेकिन वह इकलौती आभासी मुद्रा नहीं है।
इथीरियम: बाजार पूंजीकरण के लिहाज से यह दूसरी सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी है। इसे स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट पर आधारित विकेंद्रीकृत ओपन सोर्स ब्लॉकचेन की मदद से बनाया गया है। ईथर असल में इथीरियम ब्लॉक चेन की क्रिप्टोकरेंसी है। यह बिटकॉइन ब्लॉकचेन से अलग एकदम नई ब्लॉकचेन है।
बाइनैंस कॉइन: बाजार हिस्सेदारी के लिहाज से यह तीसरी सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी है। इसका इस्तेमाल बाइनैंस क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज पर शुल्क अदा करने में किया जाता है। डवलपरों के बीच बाइनैंस चेन की लोकप्रियता बढ़ती जा रही है, क्योंकि इससे उनके नेटवर्क पर लेन-देन करना काफी आसान है।
A: यह ब्लॉकचेन पर आधारित क्रिप्टोकरेंसी नहीं है। इसका ज्यादातर इस्तेमाल बड़ी कंपनियां करती हैं, जिन्हें भारी रकम लेनी-देनी होती है।
लाइटकॉइन: यह बिटकॉइन का हल्का और ज्यादा रफ्तार वाला रूप है। इसे बिटकॉइन के सोर्स कोड पर ही बनाया गया है, इसलिए इसमें और बिटकॉइन में काफी समानता है। असल में इसे कम कीमत वाले लेन-देन करने के लिए तैयार किया गया था और रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिहाज से यह काफी अच्छी है।
टोकन: कई कंपनियों ने अपनी मुद्राएं निकाल दी हैं, जिन्हें टोकन कहा जाता है। इनका इस्तेमाल उसी कंपनी से सामान या सेवाओं के लेन-देन में किया जा सकता है, जिसने इन्हें जारी किया है। अगर आप अपना टोकन तैयार करना चाहते हैं, तो नई ब्लॉकचेन बनाने की कोई जरूरत नहीं है। पहले से मौजूद पर काम करना संभव।
बाजार में मौजूद हैं कई क्रिप्टोकरेंसी- एक अनुमान के अनुसार, दुनिया में फिलवक्त 6,000 से ज्यादा क्रिप्टोकरेंसी चलन में हैं और आभासी मुद्राओं के बाजार में उनकी हिस्सेदारी 34 फीसदी के करीब है। बिटकॉइन की सफलता के बाद कई क्रिप्टोकरेंसी बाजार में उतारी गई हैं। बाजार हैसियत के लिहाज से बिटकॉइन के बाद शीर्ष 5 क्रिप्टोकरेंसी इथीरियम, बाइनैंस कॉइन, टीथर, पोल्काडॉट और कार्डेनो हैं। रिपल और लाइटकॉइन भी लंबे अरसे तक इस फेहरिस्त में डटे रहे थे और अब भी दोनों आस-पास ही हैं।
2021 Royal Enfield Classic 350 में कंपनी Tripper navigation दे सकती है. जिसकी मदद से राइडर को टर्न बाय टर्न का फीचर मिलेगा. आपको बता दें कंपनी ने ये फीचर बीते साल लॉन्च की बाइक Meteor 350 में दिया है.
नई दिल्ली. देश की जानी मानी बाइक निर्माता कंपनी रॉयल एनफील्ड अपनी सबसे पॉपुलर बाइक Classic 350 का अपडेट वर्जन लॉन्च करने वाली है. 2021 2021 Royal Enfield Classic 350 को टेस्टिंग के दौरान कई बार सड़कों पर स्पॉट किया गया है. जिसके बाद से लोगों में उत्सुकता बनी हुई है कि, नई रॉयल एनफील्ड क्लासिक 350 में कितना बदलाव होगा. आइए जानते है नई रॉयल एनफील्ड में कितना बदलाव हो सकता है.
2021 क्लासिक 350 में होगा नया प्लेटफॉर्म यूज – नई रॉयल एनफील्ड क्लासिक 350 में कंपनी नया प्लेटफॉर्म यूज करेगी. इससे पहले इस प्लेटफार्म को Meteor 350 बाइक में यूज किया जा चुका है. ऐसे में नए प्लेटफॉर्म पर क्लासिक 350 पहले के मुकाबले और भी दमदार होगी.
2021 Classic 350 में मिलेगा नया इंजन – नई रॉयल एनफील्ड क्लासिक 350 में कंपनी 349 cc का एयर कूल्ड इंजन देगी. जो मौजूदा क्लासिक 350 के इंजन में आने वाली परेशानी जैसे आवाज और vibration जैसी परेशानियों को दूर करेगा.
2021 Classic 350 में मिलेगा navigation – 2021 क्लासिक 350 में कंपनी Tripper navigation दे सकती है. जिसकी मदद से राइडर को टर्न बाय टर्न का फीचर मिलेगा. आपको बता दें कंपनी ने ये फीचर बीते साल लॉन्च की बाइक Meteor 350 में दिया है.
Body panels में होगा बदलाव – कंपनी नई क्लासिक 350 के प्लेटफार्म के साथ इसकी बॉडी में भी बदलाव करने जा रही है. नई बाइक में पहले से बेहतर सीट मिलेगी और अपडेट स्विचर भी मिलेगा. 2021 Royal Enfield Classic 350 की कीमत – रॉयल एनफील्ड क्लासिक 350 की मौजूदा समय में एक्स शोरूम शुरुआती कीमत 1 लाख 61 हजार रुपये है. ऐसे में नई क्लासिक 350 की संभावित शुरुआती कीमत 1 लाख 72 हजार रुपये एक्स शोरूम हो सकती है.
केंद्र सरकार ने जबसे आम बजट में धातुओं पर कस्टम ड्यूटी कम करने का ऐलान किया तभी से सोना और चांदी के भाव में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। गिरते दाम के बीच ज्वेलरी खरीदारी के इच्छुक ग्राहकों के लिए एक सुनहरा मौका है। हालांकि तेजी से गिर रहे सोने के दामों के कारण निवेशक दूसरे विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। देखा जाय तो पिछले 8 महीने में सोना प्रति 10 ग्राम 12,770 रुपये तक सस्ता हो गया है।
6 अगस्त 2020 को इसकी कीमत 56,200 रुपए/10 ग्राम थी। वहीं 5 मार्च को सोने का भाव 43, 430 रुपए/10 ग्राम पर आ गया है। यानी इन 8 महीनों में सोने के भाव में 22.72 फीसदी की गिरावट देखी गई है। जबकि अगस्त 2020 में सोना 56,200 रुपये/10 ग्राम पर पहुंच गया था। ये सोने की रिकॉर्ड कीमत थी। शुक्रवार को 470 रुपए तक सोना टूट गया। आखिरी दो महीने की बात करें तो 6 हजार रुपये से भी अधिक दाम नीचे चले गए हैं।
– दो महीने में 6,413 रुपये सस्ता हुआ सोना
1 जनवरी 2021 में सोने का भाव 50,300 रुपए पर था। वहीं 5 मार्च को ये 6,413 तक घटकर 43, 430 रुपए/10 ग्राम पर आ गया है। वहीं 1 जनवरी 2021 को चांदी की कीमत 66,950 रुपए प्रति किलो थी। जो अब 64,805 प्रति किलो है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड में मजबूती से हफ्तेभर में सोना 2% फिसला है।
वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशक अक्सर सुरक्षित मुनाफे की ओर रुख करते हैं। जब बाजार सामान्य होता है तक वे गोल्ड की बजाय FD, शेयर मार्केट और दूसरे इनवेस्टमेंट की ओर जाते हैं। जब बाजार अस्थाई होता है तब वे Gold की ओर रुख करते हैं। कोरोना काल में निवेशकों के लिए गोल्ड सबसे ज्यादा मुनाफे का सौदा रहा है।