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Bitcoin will eventually hit ‘$1 million a coin,’ CoinDesk editor predicts

As investor interest in cryptocurrency spikes, bitcoin could rise to $1 million over the next five years, one expert told Yahoo Finance Live.

“Bitcoin is going to $1 million a coin,” CoinDesk Learn Editor Ollie Leech said. “I actually believe that it will, at some stage, with just the scarcity aspect alone, it makes it an incredibly exciting asset to hold… Bitcoin is uncontested.”

The timing of bitcoin crossing $1 million is the big question. Leech says the next bitcoin halving — a key technical event when the amount of bitcoins awarded to miners is cut in half— is set to take place in 2024, and that will likely trigger a massive price surge.

“The year after halving always seems to create a huge rise,” added Leech. “That’s what we are seeing now. The last halving for bitcoin was in 2020, and so far this year, we have seen prices explode. I don’t know when [bitcoin will cross $1 million] but it will likely be after 2025.”

Bitcoin’s market cap is currently at more than $1 trillion, about double where it was at the start of the year. The rally has been fueled by a couple of factors, including the fact that more institutional investors are embracing the cryptocurrency.

Earlier this year Tesla invested $1.5 billion in bitcoin, while Morgan Stanley and Goldman Sachs plan to offer select clients exposure to crypto. JPMorgan is also reportedly looking at its own product in partnership with NYDIG.

Crypto is gaining momentum in the payment space as well, with Mastercard, PayPal and Visa increasing crypto exposure over the past several months.

Wall Street’s big banks and payments firms are getting involved in digital assets as a result of client demand. A recent Mastercard survey found that 40% of people plan to use cryptocurrency in the next year.

Despite the growing bullish sentiment towards crypto on Wall Street and main street, some well-known investors remain skeptical.

Legendary investor Warren Buffett’s long-time business partner Charlie Munger was critical of bitcoin at Berkshire Hathaway’s annual shareholders meeting on Saturday, saying “I think the whole damn development is disgusting and contrary to the interests of civilization.”

And that’s not the first time Buffett or Munger have criticized the cryptocurrency. Back in 2018, Buffett warned that bitcoin was “probably rat poison-squared” while Munger said investing in cryptocurrencies is “just dementia.”

Regardless of warnings from skeptics that bitcoin is highly speculative and overvalued, investors are still buying. Bitcoin was trading just above $57,000 at the time of publication, well off the highs of the year but a gain of 94% since January 1. And if Leech is right, we could see a rally of more than 1,650% in the next five years.

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ब्रह्मांड की अज्ञात ताकत से क्या पर्दा उठेगा

रोशनी से उसका कोई नाता नहीं, उसे देख नहीं सकते, लेकिन वह हैचंद्रभूषण

फिजिक्स या नैचुरल फिलॉस्फी को लेकर कोई भी बुनियादी मिजाज की चर्चा अभी डार्क मैटर और डार्क एनर्जी पर आकर अटक जाती है। हाल में एक फंडामेंटल पार्टिकल म्यूऑन पर लिए गए दो असाधारण प्रेक्षणों को लेकर पूरी दुनिया में जबरदस्त सनसनी देखी गई। कई भौतिकशास्त्री इस बात को लेकर ही तरंगित दिखे कि इससे पार्टिकल फिजिक्स के स्टैंडर्ड मॉडल को लेकर अरसे से बनी संतुष्टि समाप्त होगी और वैज्ञानिक अपनी पूरी ताकत डार्क मैटर और डार्क एनर्जी जैसे बड़े रहस्यों को समझने में लगा सकेंगे। जाहिर है, सृष्टि के मूलभूत कारोबार में दिलचस्पी रखने वाले एक आम इंसान के लिए यह जानना ज़रूरी हो गया है कि ये दोनों चीज़ें आखिर हैं क्या, और विज्ञान के लिए इन्होंने अचानक इतना केंद्रीय महत्व कैसे ग्रहण कर लिया है।

पहली मुश्किल तो द्रव्य और ऊर्जा के इन रूपों के साथ डार्क जैसा साझा शब्द जुड़ा होने से पैदा होती है। डार्क सीक्रेट और डार्क मैजिक जैसी जगहों पर इसका इस्तेमाल गर्हित या त्याज्य जैसे खराब अर्थ में होता रहा है। लेकिन यहां डार्क का मतलब सिर्फ इतना है कि वैज्ञानिक इनके होने को लेकर तो आश्वस्त हैं, लेकिन इसके अलावा इनका कुछ भी सिर-पैर फिलहाल उनकी समझ से बाहर है। दूसरे शब्दों में कहें तो डार्क शब्द यहां ‘अज्ञात’ के अर्थ में आया है। उन्नीसवीं और बीसवीं सदी के संधिकाल के जीनियस फ्रांसीसी गणितज्ञ हेनरी प्वांकारे के जमाने में भी खगोलशास्त्रियों को डार्क मैटर का कुछ-कुछ अंदेशा होना शुरू हो गया था, लेकिन प्वांकारे ने इसके लिए डार्क के बजाय ‘ऑब्स्क्योर’ (अस्पष्ट या अव्यक्त) विशेषण का इस्तेमाल किया था।

सबसे पहले 1933 में एक गैलेक्सी क्लस्टर (नीहारिका समूह) के अध्ययन के दौरान यह बात उभरकर आई थी कि अंतरिक्ष में दर्ज की जाने वाली आकाशगंगा जितनी या उससे बड़ी चीज़ों का कुल वजन उनमें मौजूद तारों, ग्रहों, उपग्रहों और धूल वगैरह के सम्मिलित वजन जितना होने के बजाय उसका कई गुना होता है। कभी-कभी तो सौ गुने से भी ज़्यादा।

इन विशाल आकाशीय संरचनाओं में किसी भी उपाय से प्रेक्षित न की जा सकने वाली कोई चीज़ है, जिसमें वजन के अलावा दर्ज करने लायक और कुछ नहीं है, और जिसे समझने के लिए छोटे स्तर पर उसकी कोई बानगी भी मौजूद नहीं है, यह बात 1970 के दशक तक पक्की हो गई थी। फिर हमारी अपनी आकाशगंगा के अध्ययन से पता चला कि इसके बाहरी तारों की रफ्तार काफी तेज़ है। सौरमंडल की तरह शनि, यूरेनस और नेपच्यून जैसे बाहरी ग्रहों के अपनी कक्षा में तुलनात्मक रूप से धीमा, और धीमा होते जाने जैसा कोई मामला वहां नहीं है। यह तभी संभव था, जब इसमें बाहर कोई अनदेखा वजन मौजूद हो।

इस तरह डार्क मैटर ने अनुमान से हटकर एक ठोस चीज़ की शक्ल अख्तियार कर ली। फिर जल्द ही यह हिसाब भी लगा लिया गया कि यह अनजाना द्रव्य पूरे ब्रह्मांड में वजन के हिसाब से सामान्य द्रव्य का- जिसमें तारों, ग्रहों-उपग्रहों, ब्लैक होल और धूल-धक्कड़ से लेकर हम-आप भी शामिल हैं- लगभग छह गुना है। अभी तो नीहारिकाओं के गुरुत्वीय प्रेक्षणों में ऐसी जगहों पर भी भारी-भरकम गुरुत्व दर्ज किया जा रहा है, जहां तारे या तो नदारद हैं या उनकी संख्या बहुत कम है। इससे डार्क मैटर को गणना की चूक या किसी अवधारणात्मक गड़बड़ी का नतीजा मानने वाली सोच लगभग अप्रासंगिक हो गई है।

डार्क एनर्जी अलबत्ता बहुत हाल की चीज़ है और एक मामले में यह डार्क मैटर से भी कम ‘डार्क’ है। डार्क मैटर के साथ किसी भी उपाय से नज़र न आने वाली बात ज़रूर जुड़ी है, लेकिन डार्क एनर्जी का क़िस्सा 1998 में इसके नज़र आ जाने के साथ ही शुरू हुआ। ब्रह्मांड फैल रहा है, यह जानकारी 1930 के दशक में हो गई थी, जब आइंस्टाइन का जलवा अपने चरम पर था। यह और बात है कि ख़ुद आइंस्टाइन ब्रह्मांड के स्टेडी स्टेट (स्थिर अवस्था) मॉडल के पक्षधर थे और अपनी पूरी दिमाग़ी क्षमता उन्होंने इसके फैलाव से जुड़े प्रेक्षणों को बैलेंस करने में लगा दी थी। बहरहाल, ब्रह्मांड के फैलने की गति को लेकर लगातार काम चलता रहा और इस कोशिश में जुटे दो अमेरिकी और एक ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिक एडम रीस, सॉल पर्लमटर और ब्रायन श्मिट 1998 में अपने इस प्रेक्षण से चकित रह गए कि जो गैलेक्सी धरती से जितनी दूर है, उसके दूर भागने की रफ्तार उतनी ही ज़्यादा बढ़ी हुई है। बाद में इसके लिए उन्हें नोबेल प्राइज भी मिला।

इस प्रेक्षण की व्याख्या करना तब तक के ब्रह्मांडीय मॉडल के बूते की बात नहीं थी। उस समय तक ऐसा माना जाता था कि ब्रह्मांड अपने प्रारंभ बिंदु बिग बैंग (महाविस्फोट) के झटके से ही फैल रहा है। जांचने की बात इतनी ही है कि आगे यह लगातार फैलता जाएगा, या एक बिंदु के बाद ठहर जाएगा, या फिर फैलाव पूरा होते ही सिकुड़ने लगेगा और सिकुड़ता हुआ वापस अपने प्रारंभ बिंदु में लौट आएगा (बिग क्रंच थीसिस)। ये सारे अनुमान ब्रह्मांड के त्वरित फैलाव की बात साबित होने के साथ ही बेमानी हो गए। ध्यान रहे, यह सिर्फ 22-23 साल पहले की बात है। त्वरित फैलाव के लिए किसी अतिरिक्त बल या ऊर्जा की ज़रूरत होती है। यह भला कहां से आ रही है? इसका स्वरूप क्या है? यह शुरू से किसी और रूप में मौजूद थी या अचानक पैदा हो गई? अगर बीच में पैदा हुई तो कब? और सबसे बड़ा सवाल यह कि इस ऊर्जा का गणित क्या होगा?

इनमें से कुछ सवालों के जवाब आसानी से खोज लिए गए। ब्रह्मांड का फैलाव नापने के लिए इन वैज्ञानिकों ने इसके सबसे प्रामाणिक उपाय 1-ए सुपरनोवा का सहारा लिया था, जिसे मानक मोमबत्ती (स्टैंडर्ड कैंडल) का दर्जा हासिल है। 1-ए सुपरनोवा वाइट ड्वार्फ तारों के किसी और तारे से जुड़ने पर होने वाले विस्फोट को कहते हैं। इसका सीधा सा फॉर्म्युला है। 30 लाख टन प्रति घनमीटर से ज़्यादा घनत्व वाला द्रव्य जब 50 करोड़ डिग्री सेल्सियस से ज़्यादा तापमान पर पहुंचता है तो उसमें कार्बन फ्यूजन होता है और इस विस्फोट में वह एक ख़ास रोशनी के साथ धधकता है। वाइट ड्वार्फ तारे किसी और तारे के विस्फोट के बाद बची हुई उसकी धुरी हुआ करते हैं और बहुत लंबा जीते हैं। एक मीटर लंबाई, चौड़ाई और ऊंचाई वाले बक्से में 20 लाख जवान भारतीय हाथियों जितना या इससे भी ज़्यादा वजन पूरे ब्रह्मांड में वाइट ड्वार्फ नाम की इस अजूबा जगह पर ही पाया जाता है। और 50 करोड़ डिग्री तापमान के बारे में तो सोचना भी सिरदर्द को न्यौता देने जैसा है।

ऐसे तारों का 1-ए सुपरनोवा की गति को प्राप्त होना वैज्ञानिकों को अरबों प्रकाश वर्ष दूर तक झांक लेने का मौका देता है। जैसे अंधियारी रात में जुगनुओं को देखकर हम यह जान लेते हैं कि वे कितनी दूर चमक रहे हैं, वैसी ही भूमिका अपनी सुपरिभाषित रोशनी के चलते अंतरिक्ष में 1-ए सुपरनोवा निभाती है। इन मानक मोमबत्तियों के प्रेक्षण के आधार पर वैज्ञानिक इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि अब से कोई छह अरब साल पहले तक (मोटे तौर पर सूरज की पैदाइश के थोड़ा पहले) ब्रह्मांड में डार्क एनर्जी का कोई प्रभाव नहीं था। बिग बैंग को तब तक सात-आठ अरब साल बीत चुके थे और ब्रह्मांड के फैलाव की गति स्थिर होने के क्रम में मंद पड़ने की तरफ बढ़ रही थी। फिर अचानक यह बहुत तेज़ी से फैलना शुरू हो गया और इसके फैलने की रफ्तार दिनोंदिन तेज़ से तेज़तर होती चली गई।

वैज्ञानिक अभी तक सृष्टि के प्रारंभ बिंदु से लेकर वर्तमान तक और संभवतः भविष्य में भी विज्ञान के नियमों को एक समान मानते आए हैं। अभी उनके सामने चुनौती न सिर्फ ब्रह्मांड रचना के नियम खोजने की है, बल्कि उन्हीं नियमों में कोई ऐसी गुंजाइश भी ढूंढ निकालने की है, जो बीच रास्ते में ही डार्क एनर्जी जैसे आश्चर्य को जन्म दे सके।

डार्क मैटर पर वापस लौटें तो मामला सिर्फ उसके नज़र न आने का नहीं है। बहुत सारी चीज़ें हमारी प्रेक्षण की सीमाओं के चलते नज़र नहीं आतीं। सूरज के अलावा बाकी तारों के भी ग्रह होते हैं या नहीं, तीस साल पहले तक यह हम नहीं जानते थे। क्योंकि तारों की तरह ग्रह प्रकाश नहीं छोड़ते। वे सिर्फ थोड़ा सा प्रकाश परावर्तित करते हैं जो उनके तारे की चमक में खो जाता है। ब्लैक होल को सिद्धांततः नहीं देखा जा सकता क्योंकि वह न तो प्रकाश छोड़ता है, न ही परावर्तित करता है। प्रकाश किरणों को अपनी तरफ झुकाने की प्रवृत्ति के चलते ग्रैविटेशनल लेंसिंग उनकी शिनाख्त का जरिया बनती है और इर्दगिर्द घूमने वाली तपती गैसों से उनकी छाया की तस्वीर भी उतारी जा सकती है।

लेकिन डार्क मैटर का तो प्रकाश के साथ कोई लेना-देना ही नहीं है। वह न तो इसे छोड़ता है, न परावर्तित करता है, न इसकी दिशा मोड़ता है, न ही इसे सोखता है। ऐसे में उसके बारे में अटकलबाजी के अलावा इतना ही किया जा सकता है कि ग्रैविटेशनल मैपिंग से उसके ढूहों का नक्शा बना लिया जाए। बहरहाल, इससे डार्क मैटर का महत्व रत्ती भर भी कम नहीं होता। ब्रह्मांड के नक्शे में गैलेक्सियों के झुंड बेतरतीबी से नहीं बिखरे हुए हैं। समय के आरपार फैले मकड़ी के थ्री-डाइमेंशनल जाले जैसी उसकी स्पष्ट संरचना यहां दिखाई पड़ती है। डार्क मैटर की भूमिका इस ब्रह्मांडीय संरचना की नींव जैसी है।

बिग बैंग के ठीक बाद जब ब्रह्मांड में सिर्फ ऊर्जा रही होगी और पदार्थ अपनी बिल्कुल शुरुआती अवस्था में रहा होगा, तब उसका किसी ढांचे में बंधना शायद ही संभव होता, क्योंकि हर तरफ ऊर्जा की भरमार उसे सेटल ही नहीं होने देती। डार्क मैटर का ग्रैविटी के अलावा और किसी भी मूलभूत बल से कोई लेना-देना अबतक नहीं पाया गया है। लिहाजा सृष्टि की सुबह में संभवतः उसी ने वह ढांचा मुहैया कराया होगा, जिस पर धीरे-धीरे ब्रह्मांड की पूरी इमारत खड़ी हुई। ऐसे में विज्ञान के लिए यह सवाल अभी अपने आप सबसे बड़ा हो जाता है कि इस डार्क मैटर की बनावट क्या है। इसके लिए अगर कण भौतिकी के स्टैंडर्ड मॉडल में कुछ गुंजाइश बनती है तो शायद डार्क एनर्जी पर भी कुछ रोशनी पड़े।

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Bitcoin retreats to weekend’s flash crash lows amid tax anxiety

Synopsis
The slide pushed Bitcoin down as much as 8% to about $50,500, sending it below the low of $51,707 reached Sunday.

By Vildana Hajric

Bitcoin declined for the sixth time in seven days, extending losses after President Joe Biden was said to propose almost doubling the capital-gains tax for the wealthy.

The slide pushed Bitcoin down as much as 8% to about $50,500, sending it below the low of $51,707 reached Sunday. The coin had tumbled as much as 15% over the weekend in the wake of a false report from an anonymous Twitter account that the U.S. Treasury was cracking down on crypto money laundering.

“One of the biggest things you have to worry about is that the things with the biggest gains are going to be most susceptible to selling,” said Matt Maley, chief market strategist for Miller Tabak + Co. “It doesn’t mean people will dump wholesale, dump 100% of their positions, but you have some people who have huge money in this and, therefore, a big jump in the capital gains tax, they’ll be leaving a lot of money on the table.”

U.S. investors in the digital asset, which has advanced about 80 per cent since December, already face a capital-gains tax if they sell the cryptocurrency after holding it for more than a year. But the coin’s been one of the best-performing assets in recent years — anyone who bought a year ago is sitting on a 625 per cent gain. For investors who bought in April 2019, that gain equals roughly 860 per cent.

The IRS has stepped up enforcement of tax collection on crypto sales. The agency — which began asking crypto users to disclose transactions on their 2019 individual tax returns — asks taxpayers whether they “received, sold, sent, exchanged or otherwise acquired any financial interest in any digital currency.”

The nervousness among the crypto crowd can be seen in another rash of speculative tweets that popped up, just days after the earlier-debunked conjecture sent the market spiraling.

To be sure, Treasury Secretary Janet Yellen would very unlikely be taking the lead role for the administration when it comes to proposing policies, if that makes anyone feel better.

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धरती से 3 गुना ज्यादा वजनी Super Earth मिला, 2.4 दिन में लगाता है एक चक्कर

वैज्ञानिकों ने धरती जैसा लेकिन उससे तीन गुना ज्यादा वजनी सुपर अर्थ (Super Earth) खोजा है. यह धरती से 36 प्रकाशवर्ष दूर है. यह अपने तारे (Red Dwarf Star) के चारों तरफ चक्कर लगा रहा है. यह अपने तारे के चारों तरफ एक चक्कर 2.4 दिन में लगाता है. यानी धरती का एक दिन उस सुपर अर्थ के दिन की तुलना में आधे से भी कम है.

इंस्टीट्यूट डे एस्ट्रोफिजिका डे कैरेनियास (IAC) के पोस्ट डॉक्टोरल रिसर्चर बोर्जा तोलेडो पैड्रन ने बताया कि इस सुपर अर्थ का नाम है GJ740. लेकिन यह बेहद गर्म है. इसका तापमान हमारे सूरज के तापमान से करीब 2000 डिग्री कम है. बोर्जा ने बताया कि इसे आप बड़े टेलिस्कोप से देख भी सकते हैं. बोर्जा की यह खोज एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स नाम के जर्नल में प्रकाशित भी हुई है.

बोर्जा का कहना है कि पहली बार कोई ऐसा सुपर अर्थ मिला है जो सबसे कम समय में अपने सूरज का एक चक्कर लगाता है. इसके अलावा एक और ग्रह कुछ दिन पहले खोजा गया था, जो अपने सूरज का एक चक्कर 9 साल में लगाता है. यह सबसे लंबा समय है किसी ग्रह द्वारा अपने तारे का एक पूरा चक्कर लगाने का. इस ग्रह का वजन धरती के वजन से 100 गुना ज्यादा है.

द केपलर मिशन (The Kepler Mission) ने अब तक 156 नए ग्रह खोजे हैं. इनमें से ज्यादातर ठंडे तारे के चारों तरफ चक्कर लगा रहे हैं. यानी इनका सूरज ठंडा हो गया है. GJ740 सुपर अर्थ को खोजने के लिए रेडियल वेलोसिटी टेक्नोलॉजी का उपयोग किया गया है. इस टेक्नोलॉजी में गुरुत्वाकर्षण शक्ति की जांच स्पेक्ट्रोस्कोपिक तरीके से किया जाता है. इससे ग्रह का आकार और वजन पता चलता है.

1998 में रेडियल वेलोसिटी टेक्नोलॉजी का सबसे पहले उपयोग हुआ था. इस टेक्नोलॉजी के जरिए अब तक 116 एक्सोप्लैनेट खोजे जा चुके हैं. चुंकि यह टेक्नोलॉजी अत्यधिक जटिल है, इसलिए इससे किसी भी ग्रह को खोजने के लिए वैज्ञानिक कतराते हैं. लेकिन यह इतनी सटीक है कि इसके जरिए आप जिस भी ग्रह का वजन निकाल सकते हैं. दिक्कत सिर्फ मैपिंग में आती है क्योंकि हर ग्रह का मैग्नेटिक फील्ड होता है, जो इस तकनीक में बाधा उत्पन्न करता है

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Asteroid Warning: धरती से टकराया ऐस्‍टरॉइड तो आएगी तबाही, आपातकालीन प्‍लान बनाने के लिए जुटेंगे विशेषज्ञ

Asteroid News: दुनियाभर के वैज्ञानिक इस महीने की आख‍िर में व‍ियना में बैठक करने जा रहे हैं। इस बैठक में धरती पर ऐस्‍टरॉइड के टकराने के खतरे के बारे में चर्चा होगी। वैज्ञानिकों का अनुमान है क‍ि अगर ऐस्‍टरॉइड धरती से टकराता है तो शरणार्थी संकट पैदा हो जाएगा।

लंदन
धरती से ऐस्‍टरॉइड के टकराने की आशंकाओं के बीच विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि अगर ऐसा संकट कभी आता है तो इससे न केवल तबाही आएगी बल्कि दुनिया में मानवाधिकारों का गंभीर संकट पैदा हो जाएगा। उन्‍होंने कहा कि अगर ऐस्‍टरॉइड के टकराने का खतरा मंडराता है तो इससे विश्‍वभर में शरणार्थियों का बड़ा संकट शुरू हो जाएगा और लोग यूरोप तथा अमेरिका को छोड़कर एशिया, पश्चिम एशिया और प्रशांत महासागर की ओर जा सकते हैं।

इसी खतरे को देखते हुए अंतरिक्ष विशेषज्ञ इस महीने एक साथ आ रहे हैं ताकि ऐस्‍टरॉइड के धरती से टकराने की सूरत में एक आपातकालीन प्‍लान बनाया जा सके। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि हमें न केवल ऐस्‍टरॉइड के टकराने के शुरुआती असर से निपटने की तैयारी करनी होगी बल्कि उसके बाद पैदा होने वाले मानवाधिकारों के संकट से निपटने के लिए तैयार रहना होगा।

पूरी दुनिया में शरणार्थी संकट पैदा हो जाएगा
वियना में आगामी 26 अप्रैल से 30 अप्रैल के बीच में प्‍लेनेटरी डिफेंस कॉन्‍फ्रेंस होने जा रहा है। इस बैठक में अंतरिक्ष मामलों के विशेषज्ञ यह चर्चा करेंगे कि अगर कोई ऐस्‍टरॉइड जैसी चीज धरती के पास वास्‍तविक रूप से आती है तो उसे लेकर क्‍या करना चाहिए। वैज्ञानिकों एक कल्‍पना के ऐस्‍टरॉइड की मदद से अपनी तैयारियों को परखेंगे। साथ ही उससे बचाव के तरीकों पर काम करेंगे।

इस दौरान वैज्ञानिक यह जानने की कोशिश करेंगे कि यह ऐस्‍टरॉइड धरती के किस हिस्‍से से टकराएगा। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि किसी छोटे ऐस्‍टरॉइड के टकराने से कुछ किलोमीटर तक और अगर कोई बड़ा ऐस्‍टरॉइड टकराता है तो उसका असर कई सौ किलोमीटर तक हो सकता है। उनका कहना है कि अगर हम पहले से तैयारी नहीं करते हैं तो इस विस्‍फोट में लाखों लोगों की जान जा सकती है। तटीय इलाकों में बाढ़ आ सकती है। इससे पूरी दुनिया में शरणार्थी संकट पैदा हो जाएगा। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अमेरिका और यूरोप में ऐस्‍टरॉइड टकरा सकते हैं जिससे एशिया में शरणार्थी संकट पैदा हो सकता है।

धरती को कितना नुकसान?
वायुमंडल में दाखिल होने के साथ ही आसमानी चट्टानें टूटकर जल जाती हैं और कभी-कभी उल्कापिंड की शक्ल में धरती से दिखाई देती हैं। ज्यादा बड़ा आकार होने पर यह धरती को नुकसान पहुंचा सकते हैं लेकिन छोटे टुकड़ों से ज्यादा खतरा नहीं होता। वहीं, आमतौर पर ये सागरों में गिरते हैं क्योंकि धरती का ज्यादातर हिस्से पर पानी ही मौजूद है।

अगर किसी तेज रफ्तार स्पेस ऑब्जेक्ट के धरती से 46.5 लाख मील से करीब आने की संभावना होती है तो उसे स्पेस ऑर्गनाइजेशन्स खतरनाक मानते हैं। NASA का Sentry सिस्टम ऐसे खतरों पर पहले से ही नजर रखता है। इसमें आने वाले 100 सालों के लिए फिलहाल 22 ऐसे ऐस्टरॉइड्स हैं जिनके पृथ्वी से टकराने की थोड़ी सी भी संभावना है।

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Gold Price: शादी के लिए जल्दी कर लें सोने की खरीदारी, अभी 9085 रुपये है सस्ता, आगे दाम बढ़ा सकती है कोरोना महामारी

कोरोना के तेजी से बढ़ते मामलों के बीच सोने-चांदी का भाव भी बढ़ता जा रहा है। लोग एक बार फिर सुरक्षित निवेश के रूप में सोना की ओर बढ़ रहे हैं। निवेशकों का रुझान  एक बार फिर गोल्ड, गोल्ड ईटीएफ और बॉन्ड की तरफ बढ़ रहा है। बीते हफ्ते सोने के भाव में 723 रुपये प्रति 10 ग्राम का उछाल आया है। जिनके घरों में शादी है और अभी तक गहने नहीं खरीदे गए हैं तो उनके लिए यह खबर थोड़ी परेशान करने वाली है। हालांकि अब भी सोना अपने ऑल टाइम हाई से अभी भी 9085 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता है और कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए इसके भाव पिछले साल की तरह आसमान छू सकते हैं।  इसी तरह चांदी भी पिछले साल के हाई से 7198 रुपये सस्ती है। बता दें बीते हफ्ते  चांदी 1880 रुपये महंगी हुई। वहीं अगर इस साल की बात करें तो बीते साढ़े तीन महीनों में सोना 2954 रुपये सस्ता हुआ है जबकि, चांदी 1427 रुपये महंगी हुई है। आंकड़े इंडिया बुलियंस ज्वैलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट से लिए गए हैं

तारीख सोने का सुबह का भाव रुपये प्रति 10 ग्राम सोने का शाम का भाव रुपये प्रति 10 ग्राम चांदी का सुबह का भाव रुपये प्रति किलो चांदी का शाम का भाव रुपये प्रति किलो
16 अप्रैल 2021 46917 47169 68286 68810
15 अप्रैल 2021 46706 46782 67953 68021
13 अप्रैल 2021 46352 46506 66444 66903
12 अप्रैल 2021 46375 46545 66854 67177
09 अप्रैल 2021 46554 46446 67175 66930
08 अप्रैल 2021 46152 46411 66905 67219
07 अप्रैल 2021 45904 45929 66139 66032
06 अप्रैल 2021 45421 45410 65600 65422
05 अप्रैल 2021 45176 45259 64546 64962
01 अप्रैल 2021 44917 44919 63634 63737
31 मार्च 2021 44228 44190 62727 62862
31 दिसंबर 2020 50123 50202 67282 67383
7 अगस्त 2020 56254 56126 76008 75013
स्रोत: IBJA

50000 रुपये तक पहुंच सकता है सोना

केडिया कमोडिटीज के डायरेक्टर अजय केडिया कहते हैं कि कोरोना वायरस का संक्रमण बढ़ता जा रहा है। इससे शेयर बाजारों में जहां अनिश्चितता का माहौल है वहीं रियल एस्टेट भी पस्त पड़ा है। इस दौर निवेशकों के लिए सबसे सुरक्षित सोना ही नजर आ रहा है। निवेशकों का रुझान गोल्ड, गोल्ड ईटीएफ और बॉन्ड की तरफ बढ़ा है। यही वजह है कि सोने के रेट बढ़ते जा रहे हैं। पिछले साल गोल्ड की कीमतों में इजाफे की वजह लॉकडाउन, कोरोना के बढ़ते मामले, ब्याज दरों का कम होना, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी आदि थी। इस साल कमोवेश हालात वैसे ही हैं। ब्याज दरें अभी कम हैं। रुपया डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर हो रहा है। दुनियाभर में पाबंदियों का एक और दौर शुरू हो चुका है, ऐसे में लोग सुरक्षित निवेश के लिए एक बार सोने की तरफ रुख कर रहे हैं। इस वजह से जून तक सोना 50000 रुपये तक पहुंच सकता है।

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Bitcoin touches $64,000 high as traders eye Coinbase listing

Synopsis
Bitcoin climbed as much as 1.6 per cent to as high as $64,207 in Asia trading. Cryptocurrency-exposed stocks such as Riot Blockchain Inc. and Marathon Digital Holdings Inc. advanced during U.S. trading hours.

Bitcoin advanced Wednesday, breaching the $64,000 level for the first time after eclipsing its most recent record in March a day earlier as the mood in cryptocurrencies turned bullish ahead of Coinbase Global Inc.’s listing this week.

The token climbed as much as 1.6 per cent to as high as $64,207 in Asia trading. Cryptocurrency-exposed stocks such as Riot Blockchain Inc. and Marathon Digital Holdings Inc. advanced during U.S. trading hours.

Crypto bulls are out in force as a growing list of companies embrace Bitcoin, even as skeptics doubt the durability of the boom. In one of the most potent signs of Wall Street’s growing acceptance of cryptocurrencies, Coinbase will list on the Nasdaq on April 14 at a valuation of about $100 billion.

Coinbase’s debut “will mark the first official juncture between the traditional financial avenue and the alternative crypto path,” Ipek Ozkardeskaya, a senior analyst at Swissquote, wrote in a note. “As such, a successful addition to Nasdaq should act as endorsement of cryptocurrencies by traditional investors.”

Goldman Sachs Group Inc. and Morgan Stanley have announced plans to offer their clients access to crypto investments. Tesla Inc. earlier this year disclosed a $1.5 billion investment in Bitcoin and more recently started accepting it as payment for electric cars.

Still, skeptics argue that digital coins have been inflated by stimulus that’s also sent stocks to records. Regulators around the world are stepping up oversight and casting doubt on its usefulness as a currency.

Isabel Schnabel, member of the executive board of the European Central Bank, called Bitcoin “a speculative asset without any recognizable fundamental value” in an interview with Der Spiegel this month.

Coinbase’s public debut this week is also boosting the digital coins of other cryptocurrency exchanges, such as Binance Coin, which has jumped to become the third-most valuable cryptocurrency behind Bitcoin and Ether.

Many analysts expect the rally to continue.

“The lowest 30-day volatility since October tells us Bitcoin is ripe to exit its cage and continue in a bull-market on its way to the next $10,000 move,” according to Mike McGlone, Bloomberg Intelligence commodities strategist. “Similar to Tesla’s equity-wealth allocation to Bitcoin, the Coinbase IPO may add to the growing list of 2021 crypto-validation milestones.”

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Asteroid से धरती को बचाने में जुटे वैज्ञानिक, Atom Bomb से किया जा सकता है हमला

Asteroid: अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के अनुसार, 22 ऐसे एस्टेरॉयड हैं जिनके अगले 100 साल में धरती से टकराने की संभावना है. अगर कोई ऑब्जेक्ट 46.5 लाख मील प्रति घंटा यानी 74 लाख किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड से धरती की तरफ आता है तो एजेंसी उसे खतरा मानती है.

वॉशिंगटन: एस्टेरॉयड (Asteroid) के धरती से टकराने के खतरे को देखते हुए अमेरिकी वैज्ञानिकों ने इससे निपटने की तैयारी शुरू कर दी है. अमेरिकी वैज्ञानिक (American Scientists) इन एस्टेरॉयड को धरती की कक्षा (Earth’s Orbit) से दूर भेजने के एक वैकल्पिक रास्ते की खोज में जुटे हुए हैं. वैज्ञानिकों ने सलाह दी है कि एस्टेरॉयड के खतरे को देखते हुए परमाणु हथियारों (Nuclear Weapons) का इस्तेमाल किया जाना चाहिए. यह गैर-परमाणु (Non-Nuclear Weapons) हथियारों से बेहतर हैं.


परमाणु हथियारों का इस्तेमाल क्यों?

बता दें कि अमेरिका (US) के लारेंस लिवरमूर नेशनल लैब (Lawrence Livermoor National Lab) के वैज्ञानिक (Scientists) अमेरिकी एयर फोर्स (US Air Force) के टेक्निकल एक्सपर्ट्स की टीम के साथ काम कर रहे हैं. इस टीम में शामिल वैज्ञानिक लांसिंग होरान ने कहा कि परमाणु बम विस्‍फोट (Nuclear Explosion) के बाद होने वाले न्‍यूट्रॉन रेडिएशन (Neutron radiation) से एस्टेरॉयड से छुटकारा पाया जा सकता है. उन्‍होंने कहा कि एक्‍स-रे (X-Rays) की तुलना में न्‍यूट्रॉन (Neutron) ज्‍यादा कारगर साबित हो सकते हैं.

इस वजह से कारगर है न्यूट्रॉन रेडिएशन

होरान के मुताबिक, एस्टेरॉयड की सतह को न्‍यूट्रॉन ज्यादा गरम कर सकते हैं. न्‍यूट्रॉन एक्‍स-रे की तुलना में धरती की कक्षा से एस्टेरॉयड को हटाने में ज्‍यादा प्रभावी होंगे. जान लें कि एस्टेरॉयड को हटाने के 2 तरीकों पर विचार चल रहा है. पहला तरीका है एनर्जी के जोरदार हमले से एस्टेरॉयड को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ दिया जाए और दूसरा तरीका है कि एस्टेरॉयड के रास्‍ते को एनर्जी की मदद से बदल दिया जाए.




अमेरिकी वैज्ञानिक होरान ने कहा कि परमाणु हथियार वाले विकल्प का इस्तेमाल तब किया जाएगा जब बहुत कम समय बचेगा. अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के अनुसार, 22 ऐसे एस्टेरॉयड हैं जिनके अगले 100 साल में धरती से टकराने की संभावना है.

बता दें कि अगर कोई ऑब्जेक्ट 46.5 लाख मील प्रति घंटा यानी 74 लाख किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड से धरती की तरफ आता है तो एजेंसी उसे खतरा मानती है. नासा सेंट्री (Sentry) सिस्टम के जरिए ऐसे खतरों नजर रखता है.

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Google का ये ऐप बंद होने जा रहा है, क्या आप करते हैं इस ऐप का यूज?

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Google अपने शॉपिंग ऐप को बंद कर रहा है. इसमें iOS और Android दोनों ऐप्स शामिल है. ऐप की बजाय Google शॉपिंग यूजर्स को इसके वेबसाइट पर रिडायरेक्ट कर रहा है. Xda Developers के अनुसार Google के शॉपिंग ऐप के स्ट्रिंग में कई जगह sunset कोडवर्ड का यूज किया गया है.

9to5 Google से बातचीत करते हुए एक गूगल के स्पोक्सपर्सन ने बताया कि शॉपिंग ऐप जून तक काम करेगा. कुछ हफ्तों के बाद गूगल इससे सपोर्ट हटा लेगा. ऐप के सभी फंक्शनलिटी शॉपिंग टैब में उपलब्ध है.

गूगल के स्पोक्सपर्सन के अनुसार वो लगातार शॉपिंग टैब और गूगल सरफेस में बिल्डिंग फीचर्स देता रहेगा. इसमें गूगल ऐप भी शामिल होगा. गूगल की शॉपिंग साइट shopping.google.com एक्टिव रहेगी.

गूगल के शॉपिंग ऐप यूजर्स को हजारों ऑनलाइन स्टोर्स से उनके अकाउंट की मदद से खरीदारी करने का ऑप्शन उपलब्ध करवाता है. गूगल शॉपिंग की मदद से यूजर्स आसानी से हजारों स्टोर्स से खरीद सकते हैं. इसके लिए वो अपने गूगल अकाउंट की मदद ले सकते हैं.

गूगल शॉपिंग एंड्रॉयड ऐप रविवार तक कई यूजर्स के लिए काम कर रहा था. लेकिन कई यूजर्स को इस ऐप पर something went wrong का मैसेज दिख रहा था. यूजर्स जब गूगल के शॉपिंग एंड्रॉयड ऐप को ओपन कर रहे थे तो उन्हें ऐप ओपन करने में दिक्कत आ रही थी

गूगल का मोबाइल शॉपिंग ऐप पहला ऐसा ऐप नहीं है जिसे गूगल ने बंद किया है. इससे पहले कई ऐप्स गूगल पहले भी बंद कर चुका है. इसमें गूगल हैंगआउट, गूगल प्लस जैसे ऐप्स शामिल है.

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WhatsApp पर भूलकर भी ना भेजे इस तरह के 5 मैसेज, जाना पड़ सकता है जेल

कैसे WhatsApp को सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल करना चाहिए। आइए जानते हैं कि आखिर WhatsApp से किस मैसेज को नहीं भेजना चाहिए जो आपको जेल पहुंचा सकते हैं। ऐसे में कुछ WhatsApp मैसेज को भेजने वक्त सावधानी बरतनी चाहिए।

नई दिल्ली, टेक डेस्क। WhatsApp का इस्तेमाल आज के दौर में हर व्यक्ति करता है। लेकिन शायद बहुत ही कम लोगों को मालूम होगा कि आखिर कैसे WhatsApp को सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल करना चाहिए। आइए जानते हैं कि आखिर WhatsApp से किस मैसेज को नहीं भेजना चाहिए, जो आपको जेल पहुंचा सकते हैं। ऐसे में कुछ WhatsApp मैसेज को भेजने वक्त सावधानी बरतनी चाहिए।

भड़काऊ मैसेज को ना भेजें

WhatsApp पर किसी भी फिल्म की पाइरेसी लिंक या 21 दिन में पैसा डबल करने की स्कीम भेज रहे हैं, तो आपका अकाउंट बंद हो सकता है। अब आपका सवाल होगा कि WhatsApp का मैसेज एन्क्रिप्टेड होता है, तो आपको कैसे मालूम चलेगा कि आखिर मैसेज में क्या लिखा है। अगर आप ऐसा सोचते है, तो बता दें कि यह उस स्थिति में होगा, अगर कोई व्यक्ति आपके मैसेज के खिलाफ शिकायत दर्ज कराता है। साथ ही WhatsApp पर डराने, धमकाने के साथ अश्लील मैसेज बिल्कुल ना भेजें। ऐसा करना खतरनाक हो सकता है। दरअसल अगर आपके मैसेज को आधार बनाकर कोई पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करा देता है, तो आपको जेल तक हो सकती है।

इन मैसेज फॉरवर्ड करने पर हो सकती है जेल

WhatsApp पर किसी को भी भड़काऊ मैसेज ना भेजे, जिससे दंगे भड़क सकते हैं। इसके अलावा WhatsApp पर किसी को भी आत्महत्या के लिए ना उकसाये। ऐसे किसी मैसेज को ना ही WhatsApp पर लिखें और ना ही उसे फॉरवर्ड करें। क्योंकि यह अपराध के दायरे में आता है। इंडियन पीनल कोर्ट यानी आईपीसी की कई धाराओं के तहत गलत मैसेज के आदान-प्रदान के तहत आपके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी। साथ ही मैसेज फॉरवर्ड करने वाले को समान दोषी मानते हुए बराबर सजा का प्रावधान है। मद्रास हाईकोर्ट ने साल 2018 के अपने फैसले में कहा था कि अगर गलत मैसेज फॉरवर्ड करना मैसेज को स्वीकार करने और उसे फॉरवर्ड करने के बराबर है।

गलती से ना बनाएं फेक अकाउंट

WhatsApp पर फर्जी अकाउंट बनाकर लोगों को परेशान करने का काम ना करें। फेक अकाउंट से लोगों को परेशान करने वाले को अपराध के दायरे में माना जाता है। अगर कोई व्यक्ति आपके फेक अकाउंट के खिलाफ शिकायत करता है, तो आपको जेल जाना पड़ सकता है।

बल्क मैसेज ना भेजें

बल्क मैसेज यानी कई सारे ग्रुप मैसेज बनाकर उसमें सैकड़ों लोगों को जोड़ने की प्रक्रिया को बंद कर देना चाहिए। क्योंकि इन बल्क ग्रुप से हजारों मैसेज भेजने पर ना सिर्फ आपके अकाउंट को बंद किया जाएगा, बल्कि आपके के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की जा सकती है। बल्क मैसेज WhatsApp पॉलिसी के खिलाफ माना जाता है। WhatsApp मशीन लर्निंग की मदद से बल्क मैसेज भेजने वाले अकाउंट की पहचान करती है। साथ ही उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

सॉफ्टवेयर हैक करने की कोशिश ना करें

अगर आप सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, भूलकर भी ये गलती ना करें। क्योंकि WhatsApp सॉफ्टवेयर को हैक करने की कोशिश को गंभीर अपराध को माना जाता है। WhatsApp सॉफ्टवेयर हैक करने पर कंपनी आपके खिलाफ लंबा लीगल नोटिस भेजा जा सकता है।

Posted by Technical Mechzone